भू‍तत्व का अर्थ है भूमि से उत्पन्न तत्व अर्थात जिस भी तत्व की उत्पत्ति में भूमि का योग सम्माहित है, वो भूतत्व है। वैसे भी हम सभी व इस सृष्टि का निर्माण भी पांच तत्वों - भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर से ही माना गया है। जिसको हम संक्षिप्त रूप से भगवान कह देते हैं। भगवान में भी ‘भ’ अर्थात भूमि प्रधान है। भूमि से उत्पन्न सभी तत्व अर्थात भूतत्व हैं। सभी पंचमहाभूत अलग-अलग रहते हुए इस सृष्टि की उत्पत्ति का कारण नहीं हो सकते हैं। जब ये पंचीकृत हो, एक दुसरे में अनुप्रविष्ट हो जाते हैं, अर्थात समाहित हो कर आखिर में भू तत्व में मिलते हैं। तो एक स्थूल सरीर की रचना करते हैं प्रत्येक खनिज, लवण, जड़ी बूटी इसी से उत्पन्न है, जल, वायु व अग्नि का आधार और संचार भी इसी पर संभव हुआ है। इसी से जीवन में संतुलन, स्थायित्व, ठहराव, एवं विकसित व्यक्तित्व मिलता है। भूतत्व जीवन में स्थायित्व प्रदान करता है तथा मानसिक स्थिरता के साथ जीवन में लयबद्धता बना कर रखता है। इसी से उत्पत्ति और अन्त माना गया है। व्यक्ति आखिर में इसी में मिट्टी में समाहित हो जाता है चाहे वह किसी भी धर्म विशेष का हो। इसी प्रकार रोग की उत्पत्ति व अन्त भी इन्ही पंचतत्वो में समाहित है। इन के सामंजस्य को बनाए रखने के लिए हमें प्रकृति की गोद में ही बैठना होगा। हमें अपने पुरातन परिवेश को वैदिक मूल्यों को समझना होगा। सृष्टि का कोई भी प्राणी इन तत्त्वो की महत्ता को नकार नहीं सकता हम कहीं भी रहे हमें अपने देश काल वातावरण को समझ कर आहार विहार आचरण करना होगा,अन्यथा विजातिया तत्वों के कारण हमें रोग व अन्य कष्ट सहन करने होंगे अपने पारम्परिक ज्ञान को अग्र पंक्ति में लाना होगा।

हमारा दृष्टिकोण व ध्येय

भू‍तत्व आरोग्य संस्थान की संरचना से हमारे ध्येय प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति एवम् स्वास्थ्य के रक्षा करना व प्रत्येक रोगी व्यक्ति की चिकित्सा एक व्यक्तिगत निजी योग व आहार-विहार न दिनचर्या तथा खान पान में उचित बदलाव से लाभ देना है। जो की प्राकृतिक आधार पर हो यदि अवश्यक्ता हुई तो आयुर्वेद के माध्यम से लक्षणों पर नहीं कारणो की चिकित्सा की जाए। चिकित्सा का आधार आयुर्वेद / पंचकर्म / प्राकृति चिकित्सा / मनोवैज्ञनिक चिकित्सा / मर्म चिकित्सा होगी। संस्था छोटे छोटे क्षेत्रो में कार्य कर रहे माडर्न व पारम्परिक वेद्यो, योगाचार्य आदि को तथा उनके अनुभूत योगों व अतुलनीय ज्ञान को भी अग्रसित करेगी।

भू‍तत्व आरोग्य संस्थान की यह प्राथमिकता होगी की रोग हेतु जो दवा दी जाए वो हमारे आयुर्वेद आचार्यों व डॉक्टरों द्वारा रोगी की नाड़ी व मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट देख कर ही कारणों को ठीक करने हेतु दी जाए। भूतत्व संस्था रोगी के साथ साथ स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य को कायम रखने हेतु कार्य करेगी ये अवलेह/घृत पाक आदि का निर्माण व्यक्ति की वात/पित्त/कफ प्रकृति को ध्यान मे रख कर विशेष तौर पर बना कर देगी, जिससे व्यक्ति आज के इस उलझनो व व्यस्ताओ से भरे समय में स्वस्थ, उत्तम व दीर्घायु जीवन प्राप्त कर सके। उसको अपने प्रकृति व शरीर के अनुसार शुद्ध व संतुलित मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त हो।

आहार क्या खाये, कब खाये, क्यो खाये

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Our Vision and Mission

The structure of the Bhutatva Arogya Institute is aimed at maintaining the health of every healthy person and treating each patient by providing benefits through personalized yoga, diet, lifestyle, and necessary changes in daily routines and food habits, based on natural principles. If needed, Ayurvedic treatment will be provided, focusing on the root causes, not just the symptoms. The foundation of the treatment will be Ayurveda, Panchakarma, Naturopathy, Psychological Therapy, and Marma Therapy. The institute will also bring together modern and traditional practitioners, yoga instructors, etc., who work in small regions, and will integrate their proven practices and invaluable knowledge.

The priority of the Bhutatva Arogya Institute will be to ensure that any medicine prescribed for an illness is provided after our Ayurvedic practitioners and doctors have examined the patient's pulse and medical test reports to address the root causes. The institute will work not only for the patients but also for maintaining the health of healthy individuals. It will specially prepare formulations like Avaleha, Ghrita, etc., keeping in mind the individual's Vata, Pitta, and Kapha constitution, to provide a healthy, optimal, and long life in today's complex and busy world. This ensures that individuals receive pure and balanced nutrients in accordance with their nature and body.

Our Glimpse

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Our Values

हमारी परंपरा एक प्राचीन आध्यात्मिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है, जो पंचतत्व – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के संतुलन पर आधारित है। इस परंपरा में मान्यता है कि शरीर और मन के रोग तब उत्पन्न होते हैं जब ये तत्व असंतुलित हो जाते हैं। भूतल उपचार विधियां योग, ध्यान, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और प्राकृतिक चिकित्सा प्रयोग करके शरीर और मन का संतुलन पुनः स्थापित करने में सहायक होती हैं। यह परंपरा व्यक्ति को प्रकृति के करीब लाकर मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास में मदद करती है। भूतल चिकित्सा जीवन के हर पहलू में सामंजस्य और संतुलन लाने का मार्गदर्शन देता है।

हमारी परंपरा में गुणवत्ता और शुद्धता को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। यह परंपरा मानती है कि किसी भी औषधि, भोजन या उपचार की प्रभावशीलता तभी होती है जब वह प्राकृतिक, शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाली हो। भूतलचिकित्सा के अनुसार, अशुद्धता या मिलावट केवल शरीर और मन के स्वास्थ्य को बिगाड़ सकते हैं, जिससे विभिन्न शारीरिक और मानसिक रोग उत्पन्न हो सकते हैं। आधुनिक सुविधाओं के बावजूद भी हमारी परंपरा में मिट्टी-पत्थरों, धातुओं, जल, वायु और सूर्य किरणों का विशेष महत्व दिया जाता है। भोजन और औषधियों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हमें जैविक या प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। किसी भी औषधि या भोजन में यदि मिलावट होती है, उसका प्रभाव हानिकारक हो सकता है। इसलिए, केवल शुद्ध, ताजा और संतुलित पदार्थों को ही स्वस्थ जीवन का आधार माना जाता है।

हमारी परंपरा में "प्राकृतिक" को जीवन और स्वास्थ्य का मूल आधार माना जाता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीना ही शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन की कुंजी है। भूतल हम मानते हैं कि पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पंचतत्वों से बने पदार्थ न केवल शरीर को पोषित करते हैं, बल्कि आंतरिक शांति और ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। प्राकृतिक साधन, जैसे हर्बल चाय, औषधीय पौधे और शुद्ध आहार का सेवन भूतल के स्वास्थ्य दर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह परंपरा रासायनिक और कृत्रिम उत्पादों से दूर रहने की सलाह देती है, क्योंकि वे शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बाधित कर सकते हैं। भूतल का विश्वास है कि जब मनुष्य प्रकृति के नियमों का पालन करता है और शुद्ध प्राकृतिक चीजों का उपयोग करता है, तो वह अधिक ऊर्जा, मानसिक स्पष्टता और स्वस्थ जीवन प्राप्त कर सकता है।

हमारी परंपरा में संगठन कार्य को पंचतत्वों के सामंजस्य की तरह देखा जाता है। जिस प्रकार पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश मिलकर संतुलन बनाए रखते हैं और जीवन को पोषित देते हैं, उसी तरह किसी भी कार्य में टीम के सदस्यों का एक साथ संतुलित रूप से काम करना सफलता की कुंजी है। भूतल दर्शन के अनुसार, हर व्यक्ति को अपनी विशेषता और शक्ति होती है, जो मिलकर एक उद्देश्य को पूर्ण करती है। जब सभी तत्व अपने अद्वितीय कौशल और गुणों से साथ योगदान देते हैं, तो सामूहिक प्रयास अधिक प्रभावशाली और संतुलित होता है। यह परंपरा सहयोग, समर्थन, विश्वास और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देती है और सामूहिकता को समाज में बने रहने का महत्व दिया जाता है। संगठन का उद्देश्य सुधार रूप से आगे बढ़ना है बल्कि उसमें एकता और स्थिरता भी बनी रहती है।

हमारी परंपरा में कस्टमाइज़ेशन को व्यक्ति के स्वभाव, आवश्यकताओं और जीवनशैली के अनुसार स्वास्थ्य और उपचार को ढालने की प्रक्रिया माना जाता है। इस दृष्टि के अनुसार, हर व्यक्ति पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के अलग-अलग संतुलन से बना होता है, और इसलिए प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आवश्यकताएं भिन्न होती हैं। भूतलत का मानना है कि किसी भी औषधि, भोजन या उपचार को हर व्यक्ति की प्रकृति और उसकी विशेष आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। चाहे वह हर्बल चाय हो, योग अभ्यास, या जीवनशैली में बदलाव - सब कुछ इस तरह कस्टमाइज़ किया जाता है कि पंचतत्वों का संतुलन बनाया रखा जा सके।यह दृष्टिकोण न केवल स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा और शक्ति को भी बढ़ाता है, जिससे दीर्घकालिक लाभ मिलता है और संतुलित जीवन और बढ़ाया जा सकता है।
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